सो जा मजे से
चैन से तू सोमरस पीकर
न कर चिंता हमारी
हम भले, भूखे ही मर जाएं,
तेरे नशे ने ही हमें
सड़कों में ला पटका,
तुझे अब भी नहीं है लाज
जाएं तो कहां जाएं।
नशा
Comments
7 responses to “नशा”
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लाजवाब👌
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वाह बहुत ही सुंदर
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वाह वाह क्या बात है, सर बहुत खूब
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अतीव सुन्दर वाह
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Nice line
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अति सुन्दर काव्य रचना , रौद्र रस से श्रृंगार की ओर जाती हुई बेहद शानदार प्रस्तुति । दोनों रसों के सुंदर सम्मिश्रण ने भाव को और भी अधिक स्पष्ट किया है । बेहतरीन ।।
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अतिसुंदर भाव
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