नशा

सो जा मजे से
चैन से तू सोमरस पीकर
न कर चिंता हमारी
हम भले, भूखे ही मर जाएं,
तेरे नशे ने ही हमें
सड़कों में ला पटका,
तुझे अब भी नहीं है लाज
जाएं तो कहां जाएं।

Comments

7 responses to “नशा”

  1. वाह बहुत ही सुंदर

  2. वाह वाह क्या बात है, सर बहुत खूब

  3. अतीव सुन्दर वाह

  4. Geeta kumari

    अति सुन्दर काव्य रचना , रौद्र रस से श्रृंगार की ओर जाती हुई बेहद शानदार प्रस्तुति । दोनों रसों के सुंदर सम्मिश्रण ने भाव को और भी अधिक स्पष्ट किया है । बेहतरीन ।।

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