5 Comments

  1. आंखें बाहर को खुलती है
    स्वयं का अनदेखा करती है
    विश्वास खुद पे होना चाहिए
    औरों पे भरोसा क्यूं करती है”
    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ, बहुत सुंदर कविता की सृष्टि हुई है। सुन्दर भाव, बेहतरीन शिल्प।

  2. “आशा रख औरों से,हर दिन क्यूं जलते जाते हैं । बोए बबूल और आम की चाहत किए जाते हैं ।” वाह, औरों से अपेक्षा ना रखने का अति सुंदर भाव , बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ।

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