नश्वर है, ये जीवन

जीवन क्या है?
क्या है जीवन!
लकड़ी का कोई फट्टा-सा,
पेड़ का कोई पत्ता-सा
कब टुट जाएं कुछ पता नहीं,
मानो कोई गुब्बारा-सा
तैरता मटका बेचारा-सा
कब फूट जाए पता नहीं।

Comments

14 responses to “नश्वर है, ये जीवन”

  1. बहुत खूब, मार्मिक

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      धन्यवाद 🙏 जी

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      🙏

  2. Praduman Amit

    Uttam vichar

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      हार्दिक धन्यवाद 🙏 जी

  3. Geeta kumari

    सत्य परन्तु मार्मिक

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      , धन्यवाद मैडम जी 🙏

  4. सुन्दर रचना

  5. Vasundra singh Avatar
    Vasundra singh

    As Kabir said, यह संसार कागद की पुड़िया
    बूंद पड़े घुल जाना है

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत आभार मैडमजी 🙏

  6. भारतीय दर्शन का सुन्दरता से प्रस्तुति

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      सादर धन्यवाद 🙏 जी

  7. Pratima chaudhary

    बहुत ही उम्दा

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