बिहार की विडंबना
गरीबी की वज़ह से
जहाँ की जनता
सङको पर निकल पङी
वहाँ के 153 करोङ,
नुमाइंदे धनाढ्य अथाह धन
53 करोङ की मिल्कियत
के मालिक हैं ।
ये धनाढ्य क्या समझेंगे
दर्द उन गरीब भूखों के
उत्पीडित, बाढ़ से पीङित
नक्सली हिंसा की जद में जीते
भूखे-नंगे, प्यासा, बिलबिलाते
जन- गण की।
नुमाइंदे
Comments
3 responses to “नुमाइंदे”
-

Nice line
-
सुन्दर रचना
-

बहुत सुंदर।
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.