न जा सकोगे

न जा सकोगे
गली से
चुरा नजर हमसे,
गली दबा देंगे,
अगर यूँ जाओगे।
नजरअंदाज कर
हमारी चौखट को,
दो कदम भी
बढ़ा न पाओगे।

Comments

10 responses to “न जा सकोगे”

  1. वाह वाह, अतीव सुन्दर

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  2. वाह!
    जबरदस्त कविता

    1. बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

  3. Geeta kumari

    “न जा सकोगे गली से चुरा नजर हमसे, गली दबा देंगे,”
    रचना में प्रेम और क्रोध सा लगा ,एक पल को लगा कि गला दबा देंगे
    फ़िर ध्यान से पढ़ा ,….ओह गली दबा देंगे ।अधिकार जताती हुई बहुत सुंदर प्रस्तुति

    1. आपकी समीक्षा शक्ति लाजवाब है। इतनी सुंदर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद। आभार

  4. वाह, बहुत खूब कविता

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  5. वाह वाह क्या बात है
    सचमुच पांडेयजी तो चुलबुल पाण्डेय हो गए।

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