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  1. वाह पंडी जी वाह , क्या कमाल की कविता लिखी है , आपकी कविता को पढ़के ऐसा , मानो खुलता गुलाब दिल में बहार , सच में आपकी कविता अनोखी है मन करता है कि बार बार पढू , अंत पुनः धन्यवाद

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