पग

पगड़ी मत उछालों बीच बाजार में,
पग होता है शान नेक इंसान का।
झूठ का दामन पकड़ जलील ना करो,
इंसानियत का गला घोंटना काम है शैतान का।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

5 responses to “पग”

  1. त्रुटियाँ हैं पर भाव अच्छे हैं

  2. सानिया का गला घोट कर जीने वाले इंसान नहीं होते

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