पत्थर का दिल

पत्थर का दिल कभी पिघलता नहीं
इसलिए तो इसमें गुमान भी नहीं होता।
तभी तो इसकी पूजा होती,
हर घर में नित सम्मान हीं होता।।

Comments

9 responses to “पत्थर का दिल”

  1. Geeta kumari

    बहुत सुंदर, आपकी बात में बहुत गहराई है।

    1. शुक्रिया बहिन

  2. वाह वाह, बहुत ही शानदार लिखा है आपने

    1. हार्दिक धन्यवाद आपका

  3. बहुत सुन्दर रचना

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