16 Comments

  1. हमारे परिपक्व बंधन पर था
    घोर अंधेरा छाया
    एक भंवरे ने आकर के
    तेरा हाल बताया
    ह्रदय की व्यथा बयान करती हुई कवि प्रज्ञा जी की बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति

  2. हमारे परिपक्व बंधन पर था
    घोर अंधेरा छाया
    एक भंवरे ने आकर के
    तेरा हाल बताया
    तेरी बेचैनी पर मेरी आँख
    भर आई
    तेरी नादानी पर मुझको
    हँसी खूब है आई
    ये कैसा अल्हण पन है ?

    दो तरफा प्रेम में हुई नोंक झोंक को व्यक्त करती हुई सुंदर रचना

Leave a Reply