पाक इश्क…

पाक इश्क अक्सर होता नहीं,
मगर जब होता है तो बेमौसम बरसता है!
और जिस पर बरसता है,
वो बहुत भीगता है,
आंसुओं से भी और उस खुमार से भी!

Comments

18 responses to “पाक इश्क…”

  1. Praduman Amit

    इश्क़ करने वाले अब, वो दो दीवाने कहाँ।
    जब चोट लगती थी, तब दर्द होता था वहाँ ।।

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    पवित्र प्रेम के विषय में बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति

  3. Pratima chaudhary

    सुन्दर समीक्षा धन्यवाद

  4. Anil Pandey

    ❤️ atulniya

    1. हार्दिक धन्यवाद

  5. Deep

    क्या कहूँ
    तुमसे मैं, क्या है इश्क,
    जान का रोग है
    बला है इश्क.

    1. वाह वाह
      बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  6. बहुत उम्दा

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