पाक इश्क अक्सर होता नहीं,
मगर जब होता है तो बेमौसम बरसता है!
और जिस पर बरसता है,
वो बहुत भीगता है,
आंसुओं से भी और उस खुमार से भी!
पाक इश्क…
Comments
18 responses to “पाक इश्क…”
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😊✍👌✍👌
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धन्यवाद सर
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Waah
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धन्यवाद सर
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Nice
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धन्यवाद
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इश्क़ करने वाले अब, वो दो दीवाने कहाँ।
जब चोट लगती थी, तब दर्द होता था वहाँ ।।-

धन्यवाद सर
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बहुत खूब
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धन्यवाद सर
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पवित्र प्रेम के विषय में बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति
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सुन्दर समीक्षा धन्यवाद
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❤️ atulniya
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हार्दिक धन्यवाद
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क्या कहूँ
तुमसे मैं, क्या है इश्क,
जान का रोग है
बला है इश्क.-

वाह वाह
बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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बहुत उम्दा
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धन्यवाद सर
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