9 Comments

  1. पानी में भी रंग है, बेरंगा मत देख,
    ज्योति जगा ले नयन में, अंधियारा मत देख,
    _________ कवि सतीश जी की बेहतरीन रचना लाजवाब अभिव्यक्ति और, उम्दा लेखन

  2. ज्योति जगा ले नयन में, अंधियारा मत देख,
    अंधियारा मत देख, रोशनी खोज डाल अब,

    Jay ram jee ki

  3. पानी में भी रंग है, बेरंगा मत देख,
    ज्योति जगा ले नयन में, अंधियारा मत देख,
    अंधियारा मत देख, रोशनी खोज डाल अब,
    रंग खोज ले और अहमिका छोड़ डाल अब।
    कहे लेखनी देख, और कर ले नादानी,
    होली में मत फेर , इस तरह पानी-पानी।

    वाह क्या बात है पानी में भी रंग है बेरंगा ना देख बहुत ही सुंदर पंक्तियां

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