पाबंदी

सच बोलने पर, आज पाबंदी लग चुकी है।
मर चुके ज़मीर, यहाँ खुलेआम बिक रहे हैं।

डर के कारण, कोई आवाज़ नहीं उठाता
यूँ तारीफों वाले बोल तो, बहुत लोग बोल रहे है।

आज जो हालत हैं, ये किसी से छुपे नहीं
खुलकर कुछ कह नहीं सकते,
बस इसीलिए संभलकर लिख रहे है।

Comments

9 responses to “पाबंदी”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां

    1. Sukhbir Singh Avatar
      Sukhbir Singh

      Thanks for appreciation

    1. Sukhbir Singh Avatar
      Sukhbir Singh

      Thanks

    1. Sukhbir Singh Avatar
      Sukhbir Singh

      Thanks

  2. Sukhbir Singh Avatar
    Sukhbir Singh

    Thanks ji

Leave a Reply

New Report

Close