बिना आपके सोचना भी मना है
बिना आपके पथ अंधेरा घना है,
बिना आपके जिन्दगी है अधूरी
पास ही रहो, जीने को हो जरूरी।
पास ही रहो
Comments
16 responses to “पास ही रहो”
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Very good poem
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Thank you ji
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Very beautiful poem satish ji…
The expression of the emotions are presented in a
Very beautiful way.. salute sir.-
आपके द्वारा की गई ये सुन्दर समीक्षाएं पूंजी स्वरूप हैं। इस उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। गीता जी
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Very nice lines, wow
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Thanks
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सुंदर
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सादर नमस्कार
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बहुत ही सुंदर प्रस्तुति है।
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बहुत बहुत धन्यवाद अमित जी
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सुन्दर प्रस्तुति
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सादर धन्यवाद
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बहुत ही सुंदर
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धन्यवाद जी
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बहुत खूब
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Thank you
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