पिता एक ऐसा शब्द है
जिसकी जितनी व्याख्या हो
वह कम है,
पिता जीवन का मूल है,
हमारा जीवन उनके
चरणों की धूल है,
पिता के बिना अपने अस्तित्व की
कल्पना करना सबसे बड़ी भूल है।
कितना संघर्ष करते हैं पिता
अपने बच्चों तक
हर सुख पहुंचाने के लिए।
खुद भूखे रहते हैं
बच्चों तक अन्न रस पहुंचाने के लिए।
खुद पसीने से लथपथ होने तक
मेहनत करते हैं पिता,
बच्चों के चेहरों पर
मुस्कान लाने के लिए।
हम भी नहीं भुला सकते
पिताजी को
फादर्स डे पर शत-शत नमन
पिताजी को।
पिता
Comments
2 responses to “पिता”
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पिता जीवन का मूल है,
हमारा जीवन उनके
चरणों की धूल है,
पिता के बिना अपने अस्तित्व की
कल्पना करना सबसे बड़ी भूल है।
……… पिता पर लिखी गई कवि सतीश जी की अति उत्कृष्ट रचना…. एकदम सच्ची पंक्तियाँ, बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. उच्च स्तरीय लेखन -
अतिसुंदर भाव
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