प्रकृति का नियम

नफ़रतों के बीज बोकर,
प्रेम की फ़सलें उगाना।
कैसे सम्भव हो सकेगा,
यह जरा हमको बताना।
शूल बो कर शूल उगेंगे,
फूल बो कर फूल उगेंगे।
यह तो प्रकृति का नियम है,
इसमें कैसा है समझाना।।
_____✍️गीता

Comments

11 responses to “प्रकृति का नियम”

  1. बहुत ही सुंदर भाव बहुत सुंदर शिल्प। यह प्रकृति का अटल सत्य है कि हम जैसा बोयेंगे वैसा ही पायेंगे। स्नेह-प्रेम बोयेंगे तो स्नेह प्रेम पायेंगे। नफरत बोयेंगे तो नफरत उगेगी। अति सुंदर रचना।

  2. Geeta kumari

    कविता की इतनी सुंदर और सटीक समीक्षा के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

  3. शूल बो कर शूल उगेंगे,
    फूल बो कर फूल उगेंगे।
    बहुत सुंदर

    1. Geeta kumari

      समीक्षा हेतु धन्यवाद सर

  4. बिल्कुल सही बात लिखी है आपने। वाह

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद पीयूष जी

  5. कुछ लोग नफरत बोकर प्रेम चाहते हैं जो कि संभव नहीं होता है। बहुत सुंदर रचना

    1. Geeta kumari

      सुंदर समीक्षा हेतु आभार सर 🙏

    1. सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

  6. नफ़रतों के बीज बोकर,
    प्रेम की फ़सलें उगाना।
    कैसे सम्भव हो सकेगा,
    यह जरा हमको बताना।
    शूल बो कर शूल उगेंगे,
    फूल बो कर फूल उगेंगे।
    यह तो प्रकृति का नियम है,

    जैसा बेवोगे वैसा ही काटना पड़ेगा बहुत खूब

Leave a Reply

New Report

Close