प्रकृति धरोहर

प्रकृति धरोहर

वृक्ष धरा कि हैं आभूषण
मनमोहक छवि बिखरती
चन्द्र रवि के किरणो से
जीवन हर्षित करती है

कोयल की मृदुगान प्यारी
जग को रोशन करती
ओश की सुनहरी बूँद
चमचम सी करती हैं

हरियाली खेतो की
सुन्दर छवि निहारती
मदमस्त मयूरा नाचे
वर्षा के संग बादल बरसे

हरियाली के ऑगन में
चिड़िया करे बसेरा
छम छम की झंकार लिए
आता हैं वसन्त का मेला

महेश गुप्ता महेश गुप्ता जौनपुरी

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