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पर्यावरण का हो रहा हरण
वृक्षो की शामत हैं आयी
लगे हैं धुन में वृक्ष काटने
प्रकृति भी देखो हैं कुम्हलाई
कटते रहे वृक्ष तो
आक्सीजन कहा से लाओगे
नन्हें मुन्हें मेहमान आयेंगे तो
क्या उनको तुम बतलाओंगे
चिडिया की चहक भी ना जाने
कौन से जादुगर ने चुराई
रुखा सुखा अब लगे धरा
अब तो कुछ शर्म करो मानव भाई
वृक्ष धरा की हैं आभुषण
लगा वृच कर दो हरा भरा जहा
क्या दिखाओगे अपने छोटे मुन्ने को
जब कर रहे हो प्रकृति का हरण
कुछ सुन्दर काम करो मानव
प्रकृति भी मुस्कान भरे
डलिया पर खिले लताये
धरा का मान सम्मान बढे
शुध्द स्वछंद बयार बहे
कोयल की गीतो में मिठास भरे
चलो एक कदम बढाये हम
लगा वृक्ष को जागरुक बनाये
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाईल – 9918845864
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