प्रकृति

प्रकृति की सुन्दरता इसलिए है कायम
इसे कभी किसी से इश्क नहीं होता
न ही ये कभी किसी के लिए रोता
इसलिए शायद सबका प्यारा होता

चांद और सितारे सदा थे और रहेंगे
पेड़ पौधे सारे सदा थे और भी सजेंगे
आवागमन चक्रीय न थमा है थमेगा
दुनियां में हरियाली सदा मौजूद रहेगा

इंसानों ने कभी न फिक्र की है जिसकी
जरूरत से ज्यादा नष्ट की संपदा सृष्टि की
चेतावनी तो सदा मिलती रही है लेकिन
छोटों ने अब सीख अपमान की है बड़ों की

Comments

5 responses to “प्रकृति”

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत सुंदर प्रस्तुति

  3. Geeta kumari

    Nice lines

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