नव – प्रभात है बीती निशा ,
जागो कोई कर रहा प्रतीक्षा ।
धूप खिली है, सब पंछी भी उठ गए,
अब रैन कहां जो सोए हो।
प्रतीक्षा
Comments
20 responses to “प्रतीक्षा”
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Very nice😊👏👍
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Thanks Rishi ji
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वाह वाह, बहुत सुंदर, जागो कोई प्रतीक्षा कर रहा है, से कर्म के प्रतीक्षा करने का बोध भी हो रहा है। लेखनी की विलक्षण क्षमता को सलाम।
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आपकी प्रेरक समीक्षा के लिए बहुत सारा धन्यवाद सतीश जी 🙏
बहुत प्रेरणा मिलती है सर आपकी समीक्षा से..
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बहुत खूब
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शुक्रिया चंद्रा जी 🙏
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सुंदर
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शुक्रिया भाई जी 🙏
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वाह जी बढ़िया पंक्तियाँ
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सादर धन्यवाद एवम् आभार सर🙏
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सुन्दर पंक्तियां
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका प्रतिमा जी🙏
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सुंदर पंक्तियां
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Thank you Mohan ji🙏
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सुंदर भाव
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Thank you dear sis. Pragya
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अतिसुन्दर
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Thanks for your nice complement 🙏
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अतीव सुन्दर
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आपका हार्दिक धन्यवाद एवम् आभार इन्दु जी 🙏
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