प्रश्न

हम क्या हमारा व्यक्तित्व क्या।
अनन्त ब्रह्माण्ड के प्रान्गन में ,
हम क्या हमारा अस्तित्व क्या ।
कब किसके गर्भ में,
कैसे कौन पनप रहा
कैसे कब कौन-सा किसका सुमन
कहाँ किस उपवन में महक रहा
अनेक प्रश्न हैं उदित
यह मन क्यू भटक रहा
अनन्त ब्रह्माण्ड के—–
सुमन आर्या

Comments

10 responses to “प्रश्न”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    वाह

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    सुन्दर

  3. Priya Choudhary

    अनंत ब्रह्मांड की विशालता में मानव का अस्तित्व कितना छोटा है very nice poem

  4. Geeta kumari

    Very nice

  5. Satish Pandey

    ‘कैसे कब कौन-सा किसका सुमन’ में समाहित प्रश्नवाचको में वृत्यानुप्रास की छटा दिखाई दे रही है। अनन्त ब्रह्मांड में मन भटक रहा है, जबकि मनुष्य का अस्तित्व छोटा सा है, वाह सुन्दर अभिव्यक्ति।

    1. Suman Kumari

      महाशय,धन्यवाद ज्ञापित ।

    2. Suman Kumari

      आपने बहुमूल्य शब्दों से मेरा हौसलाअफजाई किया
      पुनः धन्यवाद् ।

  6. प्रश्न अलंकार का सुंदर प्रयोग किया है अतः कला पक्ष बहुत मजबूत है

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