6 Comments

  1. बहुत सुंदर कविता है कवि सतीश जी की “जुड़ रहे नाजुक दिलों की भावना ही प्रेम है,स्वार्थ के बिन दूसरे को चाहना ही प्रेम है”!
    कवि की वही सुमधुर लय बद्ध शैली, जो पाठक को अंत तक बांधे रखने में सक्षम है । सुंदर शिल्प के साथ बेहतरीन प्रस्तुतीकरण ,उम्दा लेखन ..

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