प्रेम की दास्तान

प्रेम….
किसी को समझाया नहीं जा सकता।
यह तो केवल एक अनुभूति है,
जो स्वयं ही होती है।
प्रेम स्वार्थहीन है,
सागर सी गहराई लिए हुए ,
एक खूबसूरत एहसास!!
इन्तजार में और भी वृद्धि करता है
और मिलन में होता है ख़ास।
प्रेम पूर्णत: है एक एहसास,
प्रेम को आवश्यकता नहीं है समझाने की
उसको आंखें कर देती हैं बयान।
और प्रेम करने वाले,
स्वयं ही कर लेते हैं आभास।
यही है प्रेम की दास्तान॥
_____✍गीता

Comments

15 responses to “प्रेम की दास्तान”

  1. बहुत सुंदर रचना

    1. हार्दिक धन्यवाद कमला जी

  2. बहुत खूब वाह

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद पीयूष जी, आभार

  3. बहुत खूब, अति सुंदर कविता

    1. धन्यवाद सीमा जी

  4. Satish Pandey

    प्रेम स्वार्थहीन है,
    सागर सी गहराई लिए हुए ,
    एक खूबसूरत एहसास!!
    —– बहुत सुंदर कविता। बहुत लाजवाब अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      इस उत्साह वर्धन करने वाली समीक्षा के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

    1. Geeta kumari

      Thank you very much chandra ji, Thanks for your nice compliment.

  5. अति सुन्दर रचना

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद कमला जी, हार्दिक आभार

  6. अतिसुंदर रचना

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी🙏

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