ओ नवोदित पीढ़ी
मेरे भारत की,
उठ जा तू धूम मचा दे
हर क्षेत्र में हर विधा में
भारत को मान दिला दे,
तू है वह पौध जिसमें
कल के फल लगने हैं,
तूने ही राष्ट्र सजाना है
तूने ही नाम बनाना है।
पुरखों ने जो मार्ग दिया
या उन्नति की जो दिशा बनाई,
तूने उसको आत्मसात कर
थोड़ा सा कुछ नया रूप दे
आगे बढ़ते जाना है।
भारत का मान बढ़ाना है।
नशा, वासना छोड़ तुझे
ज्ञानी-विज्ञानी बनना है,
अच्छे लोगों की संगति अपना।
अच्छा तुझको बनना है।
नाश, वासना छोड़ तुझे
Comments
14 responses to “नाश, वासना छोड़ तुझे”
-
ओ नवोदित पीढ़ी
मेरे भारत की,
उठ जा तू धूम मचा दे
हर क्षेत्र में हर विधा में
भारत को मान दिला दे,
__________नवोदित पीढ़ी को सुसंस्कार संस्कार देती हुई कवि सतीश जी की अत्यंत श्रेष्ठ प्रस्तुति । समाज में एक सुंदर साहित्य देती हुई एक उच्च स्तरीय रचना, लेखनी को सैल्यूट -
ओ नवोदित पीढ़ी
मेरे भारत की,
उठ जा तू धूम मचा दे
हर क्षेत्र में हर विधा में
भारत को मान दिला दे,
__________नवोदित पीढ़ी को सुसंस्कार देती हुई कवि सतीश जी की अत्यंत श्रेष्ठ प्रस्तुति । समाज में एक सुंदर साहित्य देती हुई एक उच्च स्तरीय रचना, लेखनी को सैल्यूट-
बहुत बहुत धन्यवाद
-
-

लाजवाब रचना
-
सादर धन्यवाद
-
-

अति सुन्दर रचना
-
बहुत बहुत धन्यवाद
-
-

शीर्षक में नशा की जगह नाश त्रुटिवश टाईप हुआ
-

आपकी कविता बहुत उच्च स्तरीय है सर, नई पीढ़ी को अच्छे संस्कार देने की बहुत सुंदर भावना। लाजवाब कविता
-
बहुत बहुत धन्यवाद सर
-
-
अतिसुंदर रचना
-
सादर धन्यवाद जी
-
-

विचार अच्छे हैं
-

सुंदर प्रस्तुति
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.