प्रेम बांटों प्रेम पाओ

प्रेम ऐसा शब्द है
जो दिलों को जोड़ता है,
प्रेम के पथ का पथिक
सच्ची खुशी को भोगता है।
प्रेम नफरत से बड़ा है,
जिन्दगी का सार है यह,
प्रेम बांटों प्रेम पाओ
वेद का आधार है यह।
प्रेम का हो वास जिस पथ
वो स्वयं रोशन है पथ ,
प्रेम के राही कभी
पाते नहीं हैं कुपथ।

Comments

17 responses to “प्रेम बांटों प्रेम पाओ”

  1. प्रेम को परिभाषित करती हुई सुंदर प्रस्तुति

    1. सादर धन्यवाद जी

  2. Geeta kumari

    वाह ,सर ज़िन्दगी का सार कह गई लेखनी,
    रोहन – पथ का राज़ कह गई लेखनी।
    👏👏 अदभुत,आलौकिक ,अविस्मरणीय रचना।

    1. इस सुंदर समीक्षा हेतु कवि की ओर से आपको सादार अभिवादन

  3. बहुत ही सुन्दर

    1. सादर धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      Thanks

  4. Indu Pandey

    Very Good

    1. Satish Pandey

      Thank you

  5. Devi Kamla

    बहुत सुंदर

    1. Satish Pandey

      Thank you

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