4 Comments

  1. आपकी कविता पढ़कर जगजीत सिंह की गजल याद आ गई..
    “वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी”

    आपकी यह रचना समग्ररूप से भाव से भरी है..

    1. वाह प्रज्ञा क्या बात है इतनी सुन्दर समीक्षा के लिए हृदय की गहराइयों से शुक्रिया ।

  2. आज मैं सुबह से ही सोच रहा था बचपन पर कविता लिखने के लिए पर आपकी कविता पढ़कर मुझे बहुत खुशी हुई बहुत खूबसूरत रचना👌👌✍🙂🙂🙂☺☺☺

    1. बहुत बहुत धन्यवाद ऋषि जी ।आप भी लिखिए अपने बचपन पर एक कविता। मेरी कविता से आपको खुशी हुई ,ये जानकर बहुत अच्छा लगा । रचना की सराहना हेतु बहुत बहुत धन्यवाद.

Leave a Reply