बारिश के मौसम में कागज़ की कश्ती
डूबने का इंतज़ार ही करती रह गयी।
और ये बच्चे उड़ने के सपने लिए
उस कागज़ को पढ़ते ही रह गए।
बचपन
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Comments
5 responses to “बचपन”
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Waah
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Thank u sir
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Kya baat
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Dhanyawad aapka
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वाह
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