14 Comments

  1. बहुत ही प्रखर तरीके से आपके द्वारा सच्चाई को उजागर किया गया है। यथार्थ पर आधारित सच्ची कविता की जितनी तारीफ की जाये वह कम है। आपकी लेखनी यूँ ही सत्य पर प्रकाश डालती रहे। बहुत खूब।

  2. बहुत सुंदर तरीके से इस ज्वलनशील समस्या पर प्रकाश डाला है आपने सुमन जी। विचारणीय रचना

  3. हे नारी अपने आप को
    क्यों अबला समझती
    फिर से उठा तलवार तू,
    क्यों झांसी की रानी नहीं बनती

    वह लड़ी थी गोरे अंग्रेजों से
    तुम्हें लड़ना है भारतीय अंग्रेजों से
    यदि मेरी भाषा समझ गई हो
    फिर क्यों नहीं फूलन देवी बनती

    सुमन जी हम आपका बहुत-बहुत शुक्रगुजार हूं
    आपने बहुत ही ज्वलंत मुद्दे पर कलम चलाई है आपकी लेखनी को सलाम

    1. बहुत बहुत धन्यवाद सर
      सर आपने सहनति दी तथा इतनी सुन्दर पंक्तियो से उत्साह वर्धन किया ।
      मेंरे ख्याल से हिंसा या बदला लेकर इस विकराल समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता ।
      हर घर से इसकी शुरुआत हो यह किसी एक की समस्या नहीं ।,अपने बच्चों पे हमारी पैनी नजर हो ।उन्हे नैतिक मूल्यों से अवगत भी करवाया जाय।

  4. मर्द के नाम पर कलंक हैं वे जिनकी हरकते हैं हिजड़ों के जैसी
    बेटियां हैं शेरनी हमारी इसमें नहीं है कोई शक लेकिन
    कभी कभी जंगली कुत्ते झुण्ड में किसी लाचार बूढ़े शेर का शिकार कर लेते हैं

    बहुत ही सुन्दर बहन जी यूँ ही आगे बढ़ते रहो हमेशा ऊँचे उठते रहो

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