बदलता समय

बदलता है समय किसी को सताए नहीं
ईर्ष्या द्वेष के बीज उगाए नहीं
मिट्टी में मिल जाते हैं महल
उजाड़ कर किसी का खुद को बसाए नहीं

Comments

3 responses to “बदलता समय”

  1. Amita

    बहुत सुंदर पंक्तियां
    “जो बोएंगे वही काटेंगे”

  2. यथार्थ अभिव्यक्ति

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