बद से बदनाम

हम उनके लिए “मीर”, बद से बदनाम होते गए।
वो नादान मुझे इम्तहान पे इम्तहान लेते गए।।

Comments

9 responses to “बद से बदनाम”

  1. मीर, गुलजार, गालिब
    यह अपना नाम करके जा चुके हैं
    आप अपनी मेहनत करते हैं सुन्दर लिखते हैं यदि जरूरी ना हो तो
    अपना नाम लिखें
    यकीन मानिये चार चाँद लग जाएंगे
    आपकी कविता में..

    1. Praduman Amit

      आपकी विचार अति उत्तम है। मार्ग दर्शन देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

    2. बहुत सुंदर कविता और प्रज्ञा जी की सुंदर सलाह,

      1. धन्यवाद

  2. सुन्दर अभिव्यक्ति

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