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  1. बहुत सुंदर कव्य रचना है। इसमें कवि ने सीख दी है कि दूसरों की कमियों को नज़र अंदाज़ करना चाहिए। प्रत्येक इंसान में कमियां भी होती हैं और अच्छाइयां भी तो क्यों ना हम उसकी अच्छाइयों से कुछ सीखे और कमियों को अनदेखा करें ।कभी कभी ऐसा करने से उस व्यक्ति में सकारात्मकता भी आ सकती है ।ये एक थैरेपी का काम करेगी।

    1. इतनी शानदार समीक्षा कोई विद्वान व्यक्तित्व ही कर सकता है। समीक्षा में इस तरह का भाव विश्लेषण दिख रहा है, जो कि काबिलेतारीफ है। आपकी इस शैली को सैल्यूट है गीता जी। हार्दिक आभार व्यक्त कर रहा हूँ।

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