बयार से बातें

ए ठंडी बयार सुनो न
कभी मुझसे भी मिल जाया
करो
घड़ी दो घड़ी मुझसे बात करने आया करो
अकेला है दिल मेरा
कभी इसको ही बहला जाया करो
दर्द से तड़पता है ये
कभी अपने एहसास से सहला जाया करो
नही लगता दिल ये मेरा
कभी तो दिल्लगी कर जाया करो

Comments

6 responses to “बयार से बातें”

  1. Geeta kumari

    सुन्दर रचना

  2. बहुत सुंदर रचना, लाजवाब अभिव्यक्ति

  3. Anu Singla

    Beautiful

  4. बहुत सुंदर

  5. Noorie Noor

    Thanku to all of u

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