बस यूँ ही

तेरे ज़िस्म के पन्ने
बस यूँ ही
पलटता हूँ
मैं तेरे चेहरे में
अपनी पहली
मोहब्बत
ढूंढ़ता हूँ,
तेरी रूह से कोई
वास्ता नहीं मेरा
तेरे इश्क को मैं
अपना मुकद्दर
समझता हूँ।

Comments

19 responses to “बस यूँ ही”

  1. Rajiv Mahali Avatar
    Rajiv Mahali

    👌👌

    1. Abhishek kumar

      धन्यवाद आपका

  2. Kumar Piyush

    कविता दुबारा डाली गयी है

    1. एडिट का विकल्प नहीं है, इसलिए

  3. वाह
    सुन्दर अभिव्यक्ति की है आपने
    प्रेम की

  4. प्रेम की उत्तम अभिव्यक्ति

    1. Abhishek kumar

      🙏🙏

  5. बहुत ही लाजवाब

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