बिटिया हुयी परायी
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ना तुम भूलोगे ना हम
हाँ, यह बंधन छूटे ना, मरते दम।
यह पावन वेला, अश्रुओं की इसमें जगह नहीं
नवरंग भरेंगे इसमें, निराशाओं की ठौर नहीं
हंसकर कर पदार्पण, दूर हुए हैं हम।
नवजीवन की नववेला, यही है जीवन का खेला
बचपन की गलियां छूटी, परदेश की है हर बेटी
कर सर्वस्व समर्पण, तेरे दर पर छूटे दम।
यह रीत किसने है बनायी, बिटिया क्यूँ है परायी
पाल-पोसकर इसको, अनजानों के संग धर आई
कर दिल का टुकड़ा अर्पण, हुई यह आँखे नम।
बिटिया भयी परायी
Comments
5 responses to “बिटिया भयी परायी”
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बहुत खूब
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बहुत ही सुंदर
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Very good
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बहुत खूब
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सुन्दर और यथार्थ चित्रण
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