बीते कल

हम उनमें थे — वो मुझमें थे, उफ़ !!!! , वो क्या दिन थे।
जब हम रुठ जाते थे, तब वो चाँद सितारे तोड़ लाते थे।।

Comments

5 responses to “बीते कल”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत खूब।
    मैं भी कहूं अमित जी ये चांद तारें आज आसमान में क्यों नही दिख रहे है😊 जरूर किसी आशीक ने तोड़ लिए होंगे।😊

    बस थोड़ा सा मजाक सर

  2. बहुत ही सुंदर , एक दूसरे से प्रेम की पराकाष्ठा में जो होता है उसका सरल शब्दों में सुन्दर वर्णन किया है आपने

  3. अति उत्तम

Leave a Reply

New Report

Close