बीते पल क्यूं करें विकल,
ये पल तो एक धरोहर हैं
उन हसीन यादों को,
राही दिल में लेकर चल
फिर बीते पल ना करें विकल
पायल सी झंकार करे मन,
हर्षित हो हम रहें प्रसन्न
प्रभु की दी हुई नेमत को,
हाथ जोड़कर है नमन
_____✍️गीता
*बीते पल*
Comments
9 responses to “*बीते पल*”
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बहुत खूब
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बहुत-बहुत धन्यवाद
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सुन्दर रचना
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बहुत-बहुत धन्यवाद
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उम्दा अभिव्यक्ति और मजबूत शिल्प से सजी रचना
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सुन्दर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद प्रज्ञा जी
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बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
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सुंदर समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी🙏
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वाह, बीते पलों की यादों को सहेज कर रखने की बहुत सुंदर कविता
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