बुराइयों की जड़े

हम काटते ही नहीं ,
बुराइयों की जड़ें,
पालते हैं ,पोषते हैं ,
कभी इच्छाओं के लोभ से,
कभी रूपयों की चाह से,
जब लगता है ,
वह जड़े हमें बांधती है,
हम उठ खड़े होते हैं,
अपने विचारों के ;औजार लेकर
दौड़ते हैं, काटते हैं ,
जब क्षमता होती नहीं ,
हमारे भीतर; उसे मिटाने की..

Comments

10 responses to “बुराइयों की जड़े”

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद सर

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत ही बेहतरीन
    बहुत अच्छा संदेश देने का सफल प्रयास

    1. Pratima chaudhary

      बहुत बहुत धन्यवाद सर

  2. Geeta kumari

    समाज का यथार्थ चित्रण। सुन्दर प्रस्तुति

  3. Pratima chaudhary

    बहुत बहुत धन्यवाद

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