ღღ__तेरे लब पे सिवा मेरे, कोई नाम आये तो बुरा लगता है;
इक वही मौसम, जब हर शाम, आये तो बुरा लगता है!
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जागते रहने की तो हमको, आदत हो गयी मोहब्बत में;
नींद अब किसी रोज़, सरे-शाम आये तो बुरा लगता है!
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गर इन तन्हाईयों में गुमनाम ही, मर जाऊं तो बेहतर है;
अब किसी महफ़िल में, मेरा नाम आये तो बुरा लगता है!
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ज़र्द पड़ चुके हैं सारे, वो टूटते पत्ते, बेजुबाँ मोहब्बत के;
अब इश्क़ के नाम से, कोई पयाम आये तो बुरा लगता है!
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ज़िन्दा हैं जब तक “अक्स”, उन लबों के बे-हिसाब पैमाने;
मेरे इन होठों पे कोई और, जाम आये तो बुरा लगता है!!…
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#अक्स
“बुरा लगता है”
Comments
5 responses to ““बुरा लगता है””
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nice line
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thank uuuuu Mikesh bhai….._/\_
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Bahut sundar
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वाह बहुत सुंदर
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बहुत ही उम्दा
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