बेटी की आवाज

माँ की कोख में ही दबा देते हो,
मुझको रोने से पहले चुपा देते हो,
आँख खुलने से पहले सुला देता हो,
मुझको दुनियां की नज़र से छुपा देते हो,
रख भी देती हूँ गर मैं कदम धरती पर,
मुझको दिल में न तुम जगह देता हो,
आगे बढ़ने की जब भी मै देखूं डगर,
मेरे पैरों में बेडी लगा देते हो,
पढ़ लिख कर खड़ी हो न जाऊं कहीं,
मुझको पढ़ाने से जी तुम चुरा लेते हो,
क्यों दोनों हाथों में मुझको उठाते नहीं,
आँखों से अपनी मुझको बहा देते हो॥
राही (अन्जाना)

Comments

8 responses to “बेटी की आवाज”

  1. Dev Kumar Avatar
    Dev Kumar

    Bahut Khoob

    1. Shakun Saxena Avatar

      धन्यवाद देव भाई

      1. Dev Kumar Avatar
        Dev Kumar

        Swagatam Bhai

  2. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

  3. Pragya Shukla

    👏👏👌👌👌

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