बेटी कोई वस्तु नहीं जो
जो उसका दान करोगे,
बेटी तो बेटी है, क्यों
बेटी का दान करोगे।
ब्याह करो पर दान नहीं
क्या यह उसका अपमान नहीं,
जो वस्तु समझ कर दान हो गई,
इंसान नहीं , सामान हो गई।
—- डॉ0 सतीश पाण्डेय
बेटी कोई वस्तु नहीं
Comments
7 responses to “बेटी कोई वस्तु नहीं”
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वाह, सच्ची बात कह दी
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धन्यवाद जी
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अतिसुंदर भाव
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धन्यवाद जी
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सुन्दर सोच👏
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Dhanyvad ji
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बेटी पर उत्तम विचार
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