बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
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नन्ही -नन्ही कोमल कोपल,
जीवन जीने के मांगे पल ।
पर हाय! दुष्ट मनोविकारी मन,
समझे कुलदीप हीउत्तम।
निर्दयी दानव.. वह नर पिशाच,
जो लील गया उस जीवन को।
पर हाय! कलेजा कांपा ना ,
अपने ही हाथों बलि देकर!!
जो समझे ना वरदान उसे,
अरे हाय!अभागा बेचारा।
अपने ही हाथों फोड़ा हो,
जिसने नसीब का पिटारा ।
ओ बदनसीब! तू क्या जाने,
जिस सितारे को यूं तोड़ दिया,।
आकाश में उसे दमकना था ,
जिसे रात अंधेरेे तोड़ दिया ।
अपनी किस्मत की बलि देकर,
वह नादा इंसा हंसता है ।
दुनिया के कोने कोने में बज रहा उन्हीं का डंका है।
हर तरफ रोशनी फैली है ,
फिर भी आंखों से अंधा है।
अरे खोल कान, सुन ,
देख जरा बेटियों का ही तो डंका है ।

निमिषा सिंघल

Comments

12 responses to “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    वाह बहुत सुंदर थोड़ा और बड़ी रचना लिखने का प्रयास करें

    1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
      महेश गुप्ता जौनपुरी

      वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां

    2. NIMISHA SINGHAL Avatar
      NIMISHA SINGHAL

      ,😀

    1. NIMISHA SINGHAL Avatar
      NIMISHA SINGHAL

      Thanks

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