वो आज भी मुझे बेतहाशा
मोहब्बत करता है,
यकीन नहीं है मगर
दिल को यही लगता है..
बेतहाशा मोहब्बत
Comments
13 responses to “बेतहाशा मोहब्बत”
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सुन्दर प्रस्तुति
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सुन्दर अभिव्यक्ति प्रज्ञा जी
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Thanks
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बहुत सुंदर प्रस्तुति
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Thanksgiving
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अक्सर ऐसा होता है
काश ऐसा ही हो जाएबहुत सुंदर पंक्ति है आपकी
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आवश्यकता ही नहीं है
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सुंदर
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आपका धन्यवाद
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“नज़र तेरी, जुबां तेरी , ताज्जुब है कि इस पर भी,
नज़र कुछ और कहती है , ज़ुबां कुछ और कहती है”..
………वाह प्रज्ञा जी सुन्दर अभिव्यक्ति ।-

आपका धन्यवाद
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घणी बढ़िया
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आपका धन्यवाद
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