बेतहाशा मोहब्बत

वो आज भी मुझे बेतहाशा
मोहब्बत करता है,
यकीन नहीं है मगर
दिल को यही लगता है..

Comments

13 responses to “बेतहाशा मोहब्बत”

  1. सुन्दर प्रस्तुति

    1. सुन्दर अभिव्यक्ति प्रज्ञा जी

  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति

  3. अक्सर ऐसा होता है
    काश ऐसा ही हो जाए

    बहुत सुंदर पंक्ति है आपकी

    1. आवश्यकता ही नहीं है

    1. आपका धन्यवाद

  4. Geeta kumari

    “नज़र तेरी, जुबां तेरी , ताज्जुब है कि इस पर भी,
    नज़र कुछ और कहती है , ज़ुबां कुछ और कहती है”..
    ………वाह प्रज्ञा जी सुन्दर अभिव्यक्ति ।

    1. आपका धन्यवाद

    1. आपका धन्यवाद

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