क्यों कोई मोहब्बत के
काबिल नहीं होता ?
क्यों हर किसी के सीने में
दिल नहीं होता ?
क्यों होता है उसी बेदर्द से इश्क !
जो इस दिल के काबिल
नहीं होता…!!
“बेदर्द से इश्क”
Comments
4 responses to ““बेदर्द से इश्क””
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बहुत खूब
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Tq
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अतिसुंदर
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Tq
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