बेबसी का सैलाब

बेबसी का सैलाब कुछ ऐसा आया ,
सब रिश्तों को बहा ले गया,
तंगी कुछ ऐसी हुई कि,
हर कोई हमसे; तंग-सा हो गया,
और जनाब!कोरोना तो वैसे ही;
हैं बदनाम ;आजकल
कोरोना से बुरा तो ,
हमारा वजूद हो गया।

Comments

13 responses to “बेबसी का सैलाब”

  1. क्या बात है
    छा गए आप तो

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत बहुत आभार 🙏

  3. वाह, लाजवाब

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत आभार शास्त्री जी

  4. सुन्दर अभिव्यक्ति ।
    कोरोना का कहर ही कुछ ऐसा है
    जीवन ही अपना छलावा जैसा है

  5. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत बहुत धन्यवाद

  6. वाह वाह, आपकी लेखनी से बहुत सुन्दर काव्य सरिता प्रवाहित हो रही है। बनी रहे,

  7. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत बहुत आभार 🙏 सर

  8. This comment is currently unavailable

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत धन्यवाद

  9. Pratima chaudhary

    Nice

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