बौद्धिक संपदा (दिवस)

है अनमोल धरोहर ये अपनी बौद्धिक संपदा
कर सकता इसे कोई इसे क्षीण नहीं ,रहती साथ में सर्वदा
कोई नया काज करें , या कोई हो स्रजित् अविष्कार
हो कोई कलात्मक कार्य , या हो विचारकों के विचार
हो कोई नयी क्रति कलात्मक , या कोई संगीत आत्मक
जिन्हे व्यक्ति करे स्वयं बौद्धिक श्रम से उत्पादित
करके कुछ नया प्रतिपादित
है उसे बौद्धिक संपदा का अधिकार
लोगों की नयीं खोजे हो नवाचार ।
इनका उपयोग कर बढा सकते हम अपनी धन संपदा !!
क्यों रौब दिखाते हम पुरखों की विरासत पर
कुछ लोग लडते रहते हैं झूठी सियासत पर
इसे कोई भी छीन नहीं सकता आप की भी इजाजत पर
आओ कुछ नया करें ,और नाज करें खुद की बनाई
नयी विरासत पर
अपनी बौद्धिक संपदा को अपनी विरासत बनाये।
आओ बौद्धिक संपदा दिवस मनायें
——✍️—– एकता

Comments

5 responses to “बौद्धिक संपदा (दिवस)”

  1. राकेश पाठक

    बौद्धिक संपदा पर उत्तम विचार

  2. Amita Gupta

    अपनी बौद्धिक संपदा को अपनी विरासत बनाएं।
    आओ बौद्धिक संपदा दिवस मनाए ।
    बौद्धिक संपदा दिवस के उपलक्ष्य में आपकी रचना
    सुंदर प्रस्तुति

  3. बहुत सुंदर रचना

  4. क्या बात है बहुत खूब

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