बड़ा जखम दिया है,इस ज़माने ने
सदियों लगेगी मूशकुराने में,
अजब सी दरियादीली देखी ज़माने की,
गरीबों को रुलाने में,अमीरों को हँसाने में.
कहीं पर खुले अत्तयाचार है,तो कहीं पे
मीठी जुबान पे तलवार है,
जरा सी बात पर सारे रीशते तोड़ देते हैं,सारी
रीवायते छोड़ देते हैं,
जहान सदियों गुजर जाती हैं,”महमूद” रिश्ते बनाने में,रुठो को मानाने में.
बड़ा जखम दिया है,इस ज़माने ने
सदियों लगेगी मूशकुराने में.!
By- M.A.K
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