20 Comments

  1. हास्य रस से परिपूर्ण इस सुन्दर कविता ने चेहरे पर मुस्कान ला दी। आप तो हास्य कविता में भी परिपूर्ण हैं, वाह

    1. बहुत सारा धन्यवाद जी 🙏 यदि आपको तनिक भी हंसी आई हो तो मेरा हास्य रचना लिखने का प्रयास सफल रहा। आपकी समीक्षा वास्तव में उत्साह वर्धन करती हैं।

  2. बहुत सुंदर मैम
    शुरू से लेकर अन्त तक रोचकता बनी रही,
    हास्य के साथ -साथ लालच न करने की भी सीख के सुन्दर भाव
    अगर अन्त की पंक्तियों में थोड़ा ऐसे होता
    —->
    “यह सुनकर गुप्ता जी को,
    ज़ोर से चक्कर आया,
    कल से अब तक गुप्ता जी ने कुछ भी नहींं खाया।”
    और भी अच्छी तुकबंदी बन जाती।
    बाकी सब बहुत सुंदर

  3. खोटा लाओ
    खरा बनाओ
    भगवान की थाली ऐसी है।
    भाव अगर हो
    खोटा जिसकी
    जीवन करताली जैसी है।।
    वाह बहना तूने कमाल कर दीत्ती। अतिसुंदर रचना

  4. 🙂 बहुत बहुत आभार सहित धन्यवाद आपका भाई जी।
    इतनी सुंदर समीक्षा….🙏🙏आप सच में उत्साह बढ़ा रहे हैं।

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