भाई =दोहे

भाई हो तो भरत सा, सब कुछ कर दे त्याग
दुर्योधन की तरह जो, नहीं अलापे राग
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भाई चारा सीखना, राम भरत को जान
भाई के खातिर करे, अपने सुख का दान

Comments

3 responses to “भाई =दोहे”

    1. राकेश पाठक

      धन्यवाद

  1. बहुत सुंदर

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