भारतीय परिधान…

भारतीय परिधान सजीला
पहने जो भी लगे रंगीला।

देखी मैने एक सुन्दर बाला
हाँथों में चूड़ी, कानों में बाला।

जुल्फें जिसकी काली-काली
होंठों से टपक रही थी लाली।

माथे पर थी नीली बिंदी
होंठों पर थी अनुपम हिंदी।

सुन्दर साड़ी लाल किनारी
कमर में बिछुए भारी-भारी।

कहीं संभाले पल्लू सरपट
चाल थी उसकी डगमग-डगमग।

पीठ छुपाती कहीं बेचारी
असुविधाजनक थी साड़ी भारी।

खूबसूरती परिधान में होती
नज़र है जिनकी गंदी होती।

यही अलापें वह दिन-रात
जो रखते हैं दिल में पाप।

Comments

18 responses to “भारतीय परिधान…”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    जो कपड़ों से महिलाओं को जज करते उन लोगो से सम्बंधित बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति👌

  2. व्यंगात्मक शैली के साथ भारतीय परिधान की विशेषता भी बताने का प्रयास किया है

  3. Prayag Dharmani

    सुंदर रचना

    1. Pragya Shukla

      🙏🙏

  4. तंज कसने के साथ ही श्रृगार रस का प्रयोग तथा
    बहुत कुछ कहने प्रयास

  5. This comment is currently unavailable

  6. सुन्दर अभिव्यक्ति

  7. Priya Choudhary

    नजर किसी की ना पड़े हम बदन छुपाते रहते हैं
    पर ढके बदन को ताके यह गंदा नजरिया ना बदला
    🌹🌹बहुत सुंदर रचना🌹🌹

    1. वाह, बहुत सुंदर

  8. Geeta kumari

    खूबसूरती परिधान में नहीं,
    सोच में होती है।
    गन्दी सोच रखने वालों को,
    यह कौन समझाने जाएगा।…. बहुत ही खूबसूरती से परिधान से जज करते लोगों पर तंज कसा है। बहुत सुंदर 👏👏

  9. Pratima chaudhary

    कहीं संभाले पल्लू सरपट
    चाल थी उसकी डगमग-डगमग।

    पीठ छुपाती कहीं बेचारी
    असुविधाजनक थी साड़ी भारी
    बहुत सुंदर पंक्तियां

    1. Pragya Shukla

      धन्यवाद प्रतिमा

Leave a Reply

New Report

Close