भूख

भूख जब आती है
तन मन में हलचल मचाती है भूख को
जिंदा रखने के लिए
दुनिया क्या क्या नहीं खाती
भूख जब भूखी रह जाती है
शैतान, हैवान बन जाती है
भूख मिटाने के लिए
शरम और इज्जत भी खाती है
डाकू, आतंकी बनाती है
मगर भूख जब ईमानदारी से मिट जाती है
इंसान को भगवान् बनाती है
भूख मरी तो मर जाएगा जीव इसलिए इसका
जिंदा रहना जरूरी है
कितना भी खाओ भूख रहती
अधूरी है

Comments

2 responses to “भूख”

  1. अति सुंदर

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