9 Comments

  1. किसानों का मुद्दा उठाकर आपने उनके हक की लड़ाई में उनका साथ दिया है
    उनकी करुण व्यथा सुनाई है

    1. कविता के भाव को समझ कर उसकी समीक्षा करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

  2. आज आवाज़ आई है देखो,
    खेतों से उस हलधर की,
    जिसकी मेहनत की रंगत से,
    भूख मिटे है हर घर की
    अन्नदाता किसान की स्थिति का बेहतरीन चित्रण, उम्दा लेखन

    1. इतनी सुन्दर समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी कविता का विश्लेषण कर के टिप्पणी करने के लिए आपका हार्दिक आभार

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